मा

>> Thursday, May 18, 2006

मा
जिस दिन आया मै उसका सारा जग जगमगाया,
जब आये आन्सू आन्ख मे, उसी ने आपने सीने से लगया.
जब कभी गर्म हवा का झोका आया, उसी का आन्चल था, जिसने मुझे बचाया.
काभी जाब चला मै कान्टो पर, उसी ने अपने हाथो पर उठाया.
जब काभी आई दुःख की छाया, वही है जिसने उसे दूर भगाया.
जब कभी मायू हुया मै, उसी ने लोरी गाकर, मन बहलाया.
जब कभी भी प्यार का ज़िक्र आया, चारो तरफ़ उसी का नाम पाया.
क्या सोचते हो, वोह तो वोह है, न, हा वही तो है, मेरी मा.तुम भी तो कहो, अरे, रहुल, बब्लू, और हरी औम, आई - लव - यू मोम.

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जिन्दगी अधूरी लगती है.......

>> Sunday, March 26, 2006

जिन्दगी अधूरी लगती है
यह दुनिया, नदिया, झीले, तेरे बिन,
अधूरी लगती है.

बीतते है लम्हे, जब तेरे बिन,
जिन्दगी अधूरी लगती है.

बेह्ता है झरना जब सर-सराहट से,
आवाज उसकी अधूरी लगती है.

लिखता हू जब अपनी कहानी,
लिखावट मेरी अधूरी लगती है.

देखत हू जब चान्द को,
चान्दनी उसकी अधूरी लगती है.

देखत हू जब आईना,
सूरत अपनी अधूरी लगती है.

अब तो आ जा, सब कुच्छ पाकर भी,
यह जिन्दगी बिन तेरे अधूरी लगती है.

गौरव

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याद आएगी हमारी....

याद आएगी हमारी.
होगा जब तू अकेला, याद आएगी हमारी.
पास होगी, जब भी तस्वीर मेरी तेरे,याद आएगी हमारी.
निकलोगी जब सर्द रातो मे,याद आएगी हमारी.
जब डरने लगोगी अन्धेरो से, याद आएगी हमारी.
जब मिलोगी किसी अजनबी से, याद आएगी हमारी.
जब किसी दोस्त से जाफ़ा पायोगी,याद आएगी हमारी.
जब मिलेगी मौत की खबर हमरी, याद आएगी हमारी.
अफ़सोस! तब सिर्फ़, पास तुम्हारे होगी याद हमरी.
गौरव

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